मूढ़ भगत जब मती मन खोवे
तब तोरे दर्शन सुध बुध पावे
*
तोरे नाम प्रीत स्वर गावे
वो उन्मन मंदिर बन जावे
*
आसमान में लाख है तारे
उन सब में दिखते चेहरे तुम्हारे
*
रघुपती तुम बीन कैसे संवारे
जीवन नैया पार पधारे
मूढ़ भगत जब मती मन खोवे
तब तोरे दर्शन सुध बुध पावे
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तोरे नाम प्रीत स्वर गावे
वो उन्मन मंदिर बन जावे
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आसमान में लाख है तारे
उन सब में दिखते चेहरे तुम्हारे
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रघुपती तुम बीन कैसे संवारे
जीवन नैया पार पधारे