सवाल एक ही था, एक ही है, एक ही रहेगा।
मै कौन हूँ? दुनिया क्या है?
यहा क्या हे मेरा वास्ता?
क्या हे वो रास्ता?
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भगवान है? नही?
*
अगर है ही नही भगवान
तो बस बने रहो इन्सान।
भोग मगन हैवान
चंद पल के मेहमान।
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मानो वो है।
तो क्या है वो?
*
जवाब एक ही है
मै हूँ।
बस हूँ।
कुछ नही, कोई नही, कभी नही।
सब कुछ, हर कोई।
*
जरा सोचो साधक भोला
कर ले खुद, खुद की पहचान
कितना जीया बने अंजान
तू तो अपने घर मेहमान
*
पता ज़रूरी हे
काम जारी हे
