माँ की गोद में ~ अघोर आनंद आलय
जब जीवन की आपाधापी में मन थकने लगे,
और तन विश्राम माँगने लगे,
तब यही समय होता है —
भीतर लौट आने का।
उस मौन की ओर मुड़ने का,
जहाँ कोई समय नहीं, कोई दिशा नहीं,
सिर्फ़ माँ की गोद जैसी
एक शांत, गरम, और दिव्य उपस्थिति है।
यह एक यात्रा है —
भविष्य की ओर नहीं,
बल्कि उस क्षण की ओर
जब कुछ भी नहीं हुआ था,
फिर भी सब कुछ मौजूद था।
जहाँ हम केवल होते हैं।
“अघोरा आनंद आलय” —
यही तो है वह स्थान —
जहाँ न भय है, न द्वैत।
केवल शुद्ध आनंद।
केवल आत्मा की झलक।
🌸 पूरा लेख पढ़ें और भीतर की यात्रा पर निकलें।
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